फुर्सत के कुछ खास पलो में
एक दिन खोल बैठा
एक पुस्तक इतिहास कि
जैसे ही मेरे अँगुलियों ने
पलटे कुछ पन्ने,
तो फरफराते पन्नों
से उछल उछल कर बहुत सारे शब्द
करने लगे गुण-गान
कि कैसे बंद पड़ी थी म्यान
जहाँ से निकली तलवार
जिसके कारण बन गए राजा महान
कैसे राजाओं ने, रण-बांकुड़ो ने
दुश्मनों के खिंच लिए जबान
किसने बनवाया ताजमहल या कुतुबमीनार
किसके प्यार कि ये थी दास्तान.........
पर उस इतिहास कि पुस्तक
के हर पन्नो पर
उन उछलते कूदते शब्दों से बने वाक्य
जहाँ भी थमते थे
जहाँ भी होता था कोमा या पूर्ण विराम!
कुछ अनदेखे चेहरे
कुछ बेनामी लोगो
के साहस और दर्द कि आवाज
धीमे से कह रही थी.....
"इतिहास में हम बेशक हैं नहीं
पर हमने भी रचा है इतिहास.............."
एक दिन खोल बैठा
एक पुस्तक इतिहास कि
जैसे ही मेरे अँगुलियों ने
पलटे कुछ पन्ने,
तो फरफराते पन्नों
से उछल उछल कर बहुत सारे शब्द
करने लगे गुण-गान
कि कैसे बंद पड़ी थी म्यान
जहाँ से निकली तलवार
जिसके कारण बन गए राजा महान
कैसे राजाओं ने, रण-बांकुड़ो ने
दुश्मनों के खिंच लिए जबान
किसने बनवाया ताजमहल या कुतुबमीनार
किसके प्यार कि ये थी दास्तान.........
पर उस इतिहास कि पुस्तक
के हर पन्नो पर
उन उछलते कूदते शब्दों से बने वाक्य
जहाँ भी थमते थे
जहाँ भी होता था कोमा या पूर्ण विराम!
कुछ अनदेखे चेहरे
कुछ बेनामी लोगो
के साहस और दर्द कि आवाज
धीमे से कह रही थी.....
"इतिहास में हम बेशक हैं नहीं
पर हमने भी रचा है इतिहास.............."
57 comments:
बहुत सुंदर तरीके से आपने ये रचना लिखी है -
और उन लोगों को याद किया है जिनका नाम इतिहास में नहीं है .
बहुत खूब..!
सच कहा जिनके नाम नही होते वो ही इतिहास रचते हैं।
thanx anupama jee, vandana jee...itna quick response:)
"इतिहास में हम बेशक हैं नहीं
पर हमने भी रचा है इतिहास.............."
...
बहुत ही सधे तरीके से...गुमनाम लोगों का दर्द बयां किया है तुमने मुकेश ...जिन्हें इतिहास में जगह नही मिल पायी !
इतिहास में सिर्फ कुछ ही नाम होते हैं परन्तु इतिहास जिनसे बनता है वे तो अनाम ही रह जाते हैं.
बहुत ही बढ़िया रचना है. उत्तम ख़याल और सुन्दर प्रस्तुति.
सही कहा बेनाम रह जाने वाले भी इतिहास रचने वालो से काम नहीं होते है कुछ बेनाम हो जाते है कुछ को स्वार्थ वस कर दिया जाता है |
बहुत ही बढ़िया रचना है. उत्तम ख़याल और सुन्दर प्रस्तुति.
"इतिहास में हम बेशक हैं नहीं
पर हमने भी रचा है इतिहास.............."
- यही सच है |
itihaas se pare kai chehre hain , jinhe bhula nahi ja sakta ... darasal itihaas ko rachne mein unka hi benami saath hota hai
bhut khubsurat tarah se apne ham sabko ithas se parchit karaya hai...
इतिहास..कही अनकही बातों की एक सुरुली...प्रतिध्वनि है ..बहुत ही स्पष्ट ..यानि clean..रचना है ...नितान्त स्वाभाविक प्रत्रिकिया..अनकहा दर्द...उसके साथ अपनी होने का ..अपने अस्तित्व का भान कराती है..."इतिहास में हम बेशक हैं नहीं पर हमने भी रचा है इतिहास..'..विषयों के विस्तार के साथ हृदयग्राही शब्द चयन...कवी का निखार दिन प्रतिदिन होता दिख रहा है..बधाई....
कुछ अनदेखे चेहरे
कुछ बेनामी लोगो
के साहस और दर्द कि आवाज
धीमे से कह रही थी.....
"इतिहास में हम बेशक हैं नहीं
पर हमने भी रचा है इतिहास.............."
बहुत बढ़िया ...सच कहा ...
ऐसे चेहरे अक्सर विस्मृत हो जाते हैं....
जिनके साहस से इतिहास बनता है, उनका नाम ही नहीं होता पुस्तकों पर।
कुछ अनदेखे चेहरे
कुछ बेनामी लोगो
के साहस और दर्द कि आवाज
धीमे से कह रही थी.....
"इतिहास में हम बेशक हैं नहीं
पर हमने भी रचा है इतिहास.............."...
बहुत सुन्दर रचना....
मार्मिक भावाभिव्यक्ति....बधाई...
बहुत ही अच्छी ऐतिहासिक हिस्ट्री लिखी आपने।
धीमे से कह रही थी.....
"इतिहास में हम बेशक हैं नहीं
पर हमने भी रचा है इतिहास.............."
Kya baat kah dee...wah!
behad gambhir kavita... itihaas ke banane kee prakriya aur uske pichhe kee pristhbhumi ko behatreen roop se bayan kiya hai... shubhkaamna mukesh ji !
के साहस और दर्द कि आवाज
धीमे से कह रही थी.....
"इतिहास में हम बेशक हैं नहीं
पर हमने भी रचा है इतिहास.............."
इतिहास अपने आप में एक दस्तावेज है बीते हुए पलों का जो कुछ समय के साथ घटित होता है उसे इतिहास अपने में समां लेता है और हें इंगित करता है हमें ..आपने बहुत सशक्त वर्णन किया है ..आपका आभार
Sachmuch har vyakti ka apna itihas hota hai.
-----------
क्या ब्लॉगों की समीक्षा की जानी चाहिए?
क्यों हुआ था टाइटैनिक दुर्घटनाग्रस्त?
सुन्दर प्रस्तुति ...कई लोग हैं जिनसे इतिहास बनता है पर उनका नाम नहीं होता .....
कुछ बेनामी लोगो
के साहस और दर्द कि आवाज
धीमे से कह रही थी.....
"इतिहास में हम बेशक हैं नहीं
पर हमने भी रचा है इतिहास..........
Beautiful and very touching lines ...
.
@धन्यवाद् आनंद भैया, शिखा, अंशुमाला जी, हेम पाण्डेय जी, सुषमा !!
@शुक्रिया सत्यम...........इस लायक समझने के लिए...
@जी रश्मि दी..कुछ ऐसा ही मैंने समझाना चाहा
@बस अंजना दी, जो कुछ सरल सा सोच मान में आता है, लिख दिया...शुक्रिया..
bilkul sahi kaha...badhiya rachna
bahut utam ji
chupa hua itihas aap hi ujagar kar saktey hein[aapki kalam]]
कुछ अनदेखे चेहरे
कुछ बेनामी लोगो
के साहस और दर्द कि आवाज
धीमे से कह रही थी.....
"इतिहास में हम बेशक हैं नहीं
पर हमने भी रचा है इतिहास.............."
bahut sahi kaha hai...benam wale hi apne nam se itihass bana dete hai
कुछ अनदेखे चेहरे
कुछ बेनामी लोगो
के साहस और दर्द कि आवाज
धीमे से कह रही थी.....
"इतिहास में हम बेशक हैं नहीं
पर हमने भी रचा है इतिहास.............."
ati uttam ,ye to sach hai .
अतिसुन्दर ब्लोग !
अच्छी कविताएं !
बधाई हो !
"इतिहास में हम बेशक हैं नहीं
पर हमने भी रचा है इतिहास.............."
bahut badi sachchayee hai yah to...achcha visay chune aap.
बहुत सहजता से बहुत गंभीर बात कह दी है आपने. इतिहास की किताब में सिर्फ बड़े लोगों के नाम होते, लेकिन इतिहास रचने में छोटा से छोटा व्यक्ति भी उतना हीं भागीदार होता लेकिन गुमनाम रह जाता...बहुत अच्छी रचना, बधाई मुकेश.
हर इतिहास के पीछे कितने ही बेनाम चेहरे होते हैं...
लेकिन लोग केवल उनको ही पहचानते हैं जिनकी तस्वीरें उन पन्नों पर छपी रहती है..वो बेनाम चेहरे अपनी भूमिका निभा कर
गुमनामी में खो जाते हैं और सेहरा उन तस्वीरों के सिर पर लगा दिया जाता है....
या वो खुद लगा लेते है...
आज तक ऐसे ही इतिहास बना है..और आगे भी बनेगा ही....
क्रेडिट लेने वाले बहुतेरे मिलेंगे पर देने वाले.......????
यथार्थपूर्ण रचना...!
कल के सन्दर्भ में और आज के सन्दर्भ में भी.....!!
"इतिहास में हम बेशक हैं नहीं
पर हमने भी रचा है इतिहास.............."
बहुत ही बढ़िया रचना है. उत्तम ख़याल और सुन्दर प्रस्तुति.
देर से आने के लिए माफ़ी चाहती हूँ दोस्त |
हाँ ये सच है की इतिहास तो सबके साथ से ही रचा जाता है अगर उन्हें सबका साथ नहीं मिलेगा तो वो इतिहास रचा ही नहीं जा सकता अब देखो न वर्ल्ड कप का इतिहास हमारे खिलाडियों ने हमारे उत्साह और जूनून को देखते हुए तो रचा फिर हम उस इतिहास से अलग कैसे ? ये मिलाजुला ही तो प्रयास है |
तो आपने इतिहास के पन्ने पलट ही दिए | :(
अच्छी कोशिश |
नमन है इतिहास के ऐसे ही वीरों को ... लाजवाब रचना है ...
पर हमने भी रचा है इतिहास...!!! सही कहा मुकेश जी आपने इतिहास में बड़बोलों को ही जगह मिलती है ! व्यंग्य है !
"इतिहास में हम बेशक हैं नहीं
पर हमने भी रचा है इतिहास.............."
बहुत खूब.परदे के पीछे रहकर भी रचा जाता है इतिहास .बेहतरीन रचना के लिए बधाई,मुकेश भाई.
वाकी जो नींव की ईंट हैं वो चेहरे तो छुपे हुए ही हैं और उनके योगदान बिना तो इमारत खड़ी हो ही नहीं सकती ...संवेदनशीलता का परिचय देती रचना
"इतिहास में हम बेशक हैं नहीं
पर हमने भी रचा है इतिहास............
बेहतरीन रचना मुकेश ji ...
बेहतरीन रचना
साहस और दर्द कि आवाज
धीमे से कह रही थी.....
"इतिहास में हम बेशक हैं नहीं
पर हमने भी रचा है इतिहास.............."
सच कहा है ...हर पंक्ति अपने आप में गहन भाव समेटे हुए ...बेहतरीन अभिव्यक्ति ।
bahut sundar prastuti
..बहुत खूब।
bahuuuut badhiyaaaa..
अच्छी प्रस्तुति।धन्यवाद।
neenv ke patthar ko kisne jana hai.
वाह!
बढ़िया ढंग से प्रकाश डाला है बीते पन्नों पर!
बहुत सुन्दर भाव।। प्रेरक रचना । बधाई।
इतिहास में हम बेशक हैं नहीं
पर हमने भी रचा है इतिहास.............."
bahut khoob
"इतिहास में हम बेशक हैं नहीं
पर हमने भी रचा है इतिहास.
बहुत बढिया. परोक्ष रूप से हम भी इतिहास रच ही रहे हैं.
"इतिहास में हम बेशक हैं नहीं/ पर हमने भी रचा है इतिहास.............." इतिहास में झाँकती और नींव के पत्थर तलाशती एक खूबसूरत कविता। बधाई।
Aksharsah satya kaha...ab hamari baari hai itihaas banane ki.
bahut badhiya.....shandaar!
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