जिंदगी की राहें

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Tuesday, December 17, 2013

साइकल और चाय



रोड-साइड ढाबे पर
तीन साइकल
हीरो, हरक्युलस और एवन के
अगले एक से टायर
थे, एक जगह जुड़े हुए
पर हम थे चार
चल रही थी मंत्रणा
सामने चूल्हे पर उबलती चाय
लो अब आ गई
कटिंग चाय की ग्लास
साथ ही दो समोसे, पर चार हिस्सेदार
और! और !
कालेज के ही सुंदरी के खूबसूरती पर
उसके सादगी पर भी
चल रही थी लंबी बहस
यार !! वो तो पढ़ाई में भी है अव्वल
देखो न कैसे सर की हो गई है चहेती
कुछ तो करना ही होगा
बेशक, उसके लिए पढ़ना ही होगा
ऐसी ही सिरियस बहस के लिए
करनी पड़ती थी पीरियड बंक
चाय की चुसकियों में लगाते थे
लंबा समय हम
बिल पे करने वाला बकरा
हर दिन होता था अलग !!

पर यार! आज भी
उन निरुद्देश्य मीटिंग्स
के सहेजे हुए दृश्य
मानस पटल पर ला देते हैं
खूबसूरत मुस्कुराहट !!

अच्छा लगता है न !!