जिंदगी की राहें

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Thursday, March 7, 2013

ऐ हसीना !!


आज महिला दिवस पर कुछ पंक्तियाँ अपने जिंदगी से जुड़ी सबसे खूबसूरत महिला को समर्पित करता हूँ, आखिर जिंदगी तो उसी से है .... कुछ साधारण से शब्द उसके लिए

ऐ हसीना !!
क्या तू बन पाएगी मेरी रचना
शब्द मे सज पाएगी कभी
क्या कभी चंचल शोख अदा
ढल पाएंगे, बन पाएंगे नज्म
बालों का झटकना
कैसे दिखाऊँ अपने हरफ़ों मे
गोरा सुर्ख चेहरा, छरहरा बदन
नारी की नजाकत
कैसे लाऊं शब्दो मे ??
.
चलो कोई नहीं
तुम्हारे से ही
हो जाएगी कविता सृजित
आखिर ये रचना तुम्हें ही तो
करनी थी अर्पित
अब तो मुस्कुरा दो........

कुछ ट्रोफिज में से एक सबसे अहम .....:):):

Monday, January 21, 2013

ऐसा क्यों होता है


हर बार ऐसा क्यों होता है 
अँधेरी सुकून भरी रात में 
नरम बिछौने पर 
नींद आने के बस 
कुछ पल पहले 
मन के अन्दर से 
अहसासों के तरकश से 
शब्दों के प्यारे बाण  
लगते हैं चलने....
मन ही मन 
कभी-कभी वास्तविक घटनाओं पर 
तो कभी काल्पनिकता 
की दुनिया में
हो जाते हैं गुम ... और
बस फटाक से 
कविता रच जाती है ...
.
पर ओह!
सुबह का ये नीला आकाश 
दिखते  ही ...
दूध-सब्जी लाने में 
बच्चो को स्कुल भेजने में 
न्यूज पेपर के व्यूज में 
आफिस की तैयारी में 
सारे सहेजे शब्द सो जाते हैं 
गडमगड हो जाते हैं एहसास ....

सारा रचना संसार 
खो जाता है 
सरे शब्द भाव उड़ जाते हैं 
शब्द सृजन की हो जाती है
ऐसी की तैसी
दूसरी रात आने तक ...
और फिर अंदर चलता रहता है
उथल-पुथल ....
ये क्यों होता है 
हर दिन ???