जिंदगी की राहें

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Wednesday, February 19, 2014

कैनवेस


गूगल से 

था एकांत! मन में आया विचार
काश! मैं होता एक ऐसा चित्रकार
हाथ में होती तक़दीर की ब्रश

और सामने होती,
कैनवेस सी खुद की ज़िन्दगी
जी भर के भरता, वो सब रंग
जो होती चाहत, जो होते सपने

होते सारे चटक रंग
लाल, पीले, हरे, नारंगी
या सफ़ेद, आसमानी
जैसे शांत सौम्य रंग

ताकि मेरे तक़दीर की ब्रश
सजा पाती ज़िन्दगी को
जहाँ से दीदार कर पाते हैं ढेरों खुशियाँ
सिर्फ खुशियाँ !!

पर इन चटक और सौम्य रंगों के
मिश्रण से ही एक और रंग बना
जो था श्याम, थी कालिख
जो है रूप अंधकार का
जो देता है विरोधाभास!!

दी जिंदगी ने समझ
अगर नहीं होगा दुख और दर्द
तो नहीं भोग पाएंगे सुख
अहसास न हो पायेगा ख़ुशी का.... !!

फिर दर्द से भरे चित्र अनमोल होते है, ये भी सुना मैंने 


~मुकेश~


Friday, February 14, 2014

मेरा शहर





कल गहरी नींद में था सोया
तो मेरे शहरने मुझे जगाया
कुनमुनाते हुए मैंने ज्यों ही
अधमुँदी आंखो से देखा
मेरा शहर ज़ोर से चिल्लाया

मरदूद! कितने गिरे इंसान हो
इंसान हो भी या पाषाण हो
........इसी शहर में रहते हो ?
फिर भी, इसी को बदनाम करते हो ?
उफ! मेरे आदरणीय शहर
अब बोल भी दो, क्यों चिल्लाते हो
क्यों इस फटेहाल को सताते हो

बद्तमीज़! तुझे याद भी है ?
जब कॉलोनी के गोल चक्कर से
तू अपने खटारे बजाज से गुजर रहा था
तो कोने वाले दरवाजे से
किसी अपने के एक्सीडेंट में गुजर जाने का दर्द
तेज विलाप में नजर आ रहा था

पर तू ! तू तो सिर्फ रुका, ठिठका
और फिर चुपचाप खिसका 
कुछ दिन पहले भी मैंने तुझे देखा था
भूख से बिलखता, एक नौ साल का बच्चा
माँ-बाप से बिछड़, तेरे पास से गुजरा था
पर तूने देखकर भी अनदेखा किया था
और, और! उस दिन तो तूने अति कर दी थी
जब सड़क पर एक मनचले ने, तेरे सामने ही

मासूम सी लड़की का दुपट्टा खींचा था
तब भी कुछ कहने से तू झिझका था
एक बार तुम्हारे सामने चलते बस में जेब कतरे ने
एक उम्रदराज की पर्स उडाई थी
पर फिर भी तुझे क्या,
अनदेखा कर सीट पर आँख झपकाई थी

ए पाषाण! तेरे जैसे के कारण ही
मैं बिलखता हूँ, रोता-चिल्लाता हूँ
पर तुम्हारे जैसे की जिंदगी ढोता हूँ
काश! तुझे देश-शहर निकाला जैसा
कोई गंभीर सजा दे दिया जाता !!

देख आज भी सिर्फ तेरी नींद खड़कायी है
तुम्हारी अंतरात्मा ही तो जगाई है
अब बस! मेरा इतना सा कहना मानना
नींद से जागते ही, अपने अंदर के इंसान को जगाना
बस इतना सा कहना मान ही लेना

मानेगा ?
____________________________________
मेरा शहर हर पल परेशान करता है, क्या करूँ  खुद को बदलूँ या शहर को 

 इजराइली कलाकार मोशेल कैसेल की पेंटिंग हलेलुजाह

Monday, February 10, 2014

प्यार !



प्यार जो है ढाई आखर शब्द

प्यार मौन का

प्यार नजरों का

प्यार अहसासों का

प्यार साँसो का

प्यार दिलों का

प्यार स्पर्श का

प्यार दूरी का

प्यार धड़कन का

प्यार गंध का

प्यार सुगंध का

प्यार शब्दो का

प्यार लिखावट का

प्यार चिन्ह का

प्यार प्यार का

प्यार उसकी इबादत का

प्यार उसकी हसरतों का

प्यार उसकी अहमियत का

प्यार जिंदगी का

प्यार ज़िंदगानी का

प्यार उसका

प्यार मेरा

प्यार हम दोनों का

प्यार ही है न :)



Wednesday, February 5, 2014

मित्रता का गणितीय सिद्धांत



शांत सौम्य निश्छल
थी उम्रदराज
बस थोड़ी होंगी उम्र में बड़ी
यानि संभावनाएं....
मित्रता के साथ
थी, मिलने वाली सलाह की
उम्मीद तो रहती ही है
पर ये उम्मीद हुई भी पूरी
कभी मिली सलाह
कभी की उन्होने खिंचाई
कुछ साहित्यक त्रुटियाँ भी बताई
हमने भी सीखा व सराहा !

एक बार, अनायास ही हुआ उजागर
उनके व्यक्तित्व का नया अनबूझा सा पन्ना
नितांत वैयक्तिक उपलब्धियों की लालसा में
चतुराई से किया हुआ
जोड़, घटाव, गुणा भाग का
एक अलग गणित
संबंधो के धरातल पर
क्योंकि वो गढ़ रही थी
रिश्तों के नए प्रमेय
जो था नए संबंधो पर आधारित!
तभी तो “दो सामानांतर रखाओं को
जब त्रियक रेखा काटे तो
होते हैं, एकांतर कोण बराबर”
इसी सिधान्त पर समझा रहीं थी
ढूंढ रही थी, मेरी गलतियाँ
ताकि, दिख पाये, सब बराबर
आजमाए गए गणितीय सूत्र
ताकि सिद्ध हो पाये कि
रिश्तों के प्रमेय
का गढ़ना है उचित !!

माफ करो यार !!
ऐसी मित्रता को दूर से सलाम
एक गणितीय सिद्धान्त और है
“समानान्तर रेखाएँ
मिलती हैं अनंत पर जाकर”
तो एक स्पेसिफिक स्पेस
बना लिया है मैंने
हर समय के लिए
बी हॅप्पी न ................!! 

________________
कहानीकार के तरह कवितायें गढ़ने के लिए भी प्लॉट की जरूरत होती है, कभी कभी ........ एक ऐसे ही प्लॉट के साथ !!


Wednesday, January 29, 2014

शब्द


है अजीब दुनिया शब्दों की
कभी दर्द से कराहते हैं शब्द
तो कभी खुशियों से से खिलखिलाते शब्द
जिंदगी में संबल भरते शब्द
मिठास उढ़ेलते, गरम एहसास जगाते शब्द !

हथियारों जैसे संहार करते शब्द
तो अंकुरित सृजन करते सुंदर शब्द
कभी प्रार्थना व दुआ देते शब्द
तो बद-दुआओं से भरे कठिन शब्द
चोट पहुँचते खतरनाक शब्द
तो दवा-दारू जैसे मरहम करते शब्द
केंद्र होते हुए परिधि को संचालित करते शब्द
परिधि से केंद्र पर आश्रित होते
आभारी शब्द
परस्पर अन्योनाश्रित
जीवनशक्ति होते शब्द
जिंदा, ज़िंदादिल, जिंदाबाद शब्द
मर-मर कर तड़पते मुर्दाबाद शब्द !

उफ! आह! से आहा ! तक की
दूरी तय करते शब्द !
तो कभी चमत्कृत करते शब्द !!   
इंसान को मुखर बनाते शब्द
कभी मौन हो इंसान बनाते शब्द !!


Tuesday, January 21, 2014

वोटों के भिखारी



बड़ा पेट, भोला चेहरा
नेताजी का है सबसे जुदा चेहरा
जमीन से जुड़े कहे जाते थे
जब छुटभैये नेता के शुमार में आते थे
हर छोटे-बड़े कामों में व सभाओं में
जनता के बीच ये चेहरा नजर आता था
बेशक जनता का काम तब भी नहीं हो पाता था
पर नेताजी का अपनापन अपना सा लगता था
                 
धीरे धीरे बदला वक़्त, बदली किस्मत
बड़े नेताओं के कतार में, आ गए नेताजी
बड़े मंच से अब वो बड़े मुद्दे पर दहाड़ते  हैं
अगले क्रम के नेता कहलाते हैं
नेताजी के दिल में करुणा का कारख़ाना होता था
पर वक़्त आने पर उसका फाटक खुल नहीं पाता था

कहते  हैं जब लोग बड़े- पहुंचे हो जाते हैं
तो कीचड़ में पैर ज्यादा फंस जाते हैं
पर जनता को कौन समझाये, इतना तो बनता है
नेताजी के ऊपर पड़े भ्रष्टाचार की छींटो को
साफ करने हेतु पार्टी व सरकारी अमला लग जाता है
एक सूत्री कार्यक्रम फिर होता है,
हार नहीं मानेंगे, ठान लिया है, कर दिखाएंगे
नेताजी को झक सफ़ेद चमकाएंगे

यूं तो मुआ कैमरे का लेंस, इसको देख कर
नेताजी की आँखें, पहले चमचमा उठती थी
पर बदले चश्मे में वो आज तमतमा उठी थी
नेताजी, गुस्से में चिल्लाये, जांच करा लीजिये
पाक साफ हैं, हम, हमें न सीखाइए
नेताजी का आवेश, रुक नहीं पाता था
वैसे भी खुद की गलती पर हर कोई बरसता है

कभी कुछ हजारों की संपत्ति वाले फटेहाल नेताजी
अब बस कुछ अरबों में खेलते हाँ
लेकिन आज भी चुनाव आने पर
वोटों के लिए भिखारी बन तरसते हैं !!