जिंदगी की राहें

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Wednesday, January 15, 2014

“छमिया”

दिल्ली फिल्म फेस्टिवल से खींची गई तस्वीर
"छमिया" ही तो कहते हैं
मोहल्ले से निकलने वाले
सड़क पर, जो ढाबा है
वहाँ पर चाय सुड़कते
निठल्ले छोरे !
जब भी वो निकलती है
जाती है सड़क के पार
बरतन माँजने
केदार बाबू के घर !!

एक नवयुवती होने के नाते
हिलती है उसकी कमर
कभी कभी खिसकी होती है
उसकी फटी हुई चोली
दिख ही जाता है जिस्म
जब होती है छोरों की नजर
पर इसके अलावा
कहाँ वो सोच पाते हैं
भूखी है उसकी उदर !!

आजकल छमिया” भी
जानबूझ कर
मटका देती हैं आंखे
साथ ही लहरा देती है
वो रूखे बालों वाली चोटी
जो छोरों के दिल में
ला देती है कहर
आखिर घूरती आँखों
के जहर
से, वो शायद हो गई
है, बेअसर !!

छमिया आखिर समझने
लगी है
मिटाने के लिए भूख
भरने के लिए उदर
जरूरी है ये सफर

अंतहीन सफर !!!   

दिल्ली फिल्म फेस्टिवल से खींची गई तस्वीर

Thursday, January 9, 2014

मौसम और रिश्ते !!


दिल्ली फिल्म फेस्टिवल से खींची हुई तस्वीर 

मौसम की आवोहवा रिश्तों पर करती है असर !
ठंडी संवेदनाएं
और जम कर बनता बर्फ
जैसा हो जाता है रिश्ता
अंधेरी सर्द भरी रात
बिलकुल घुप्प एवं ठंडी
दूरी में रहती है गर्माहट
तो नज़दीकियाँ लाती है सर्द
ये रिश्ता भी है अजीब
मौसम की आवोहवा करती है असर !!

कभी कभी रिश्तों के बीच
चलती है लू जैसी गरम हवा
ढाती है कहर
झुलसा देती है अंदर तक
क्षण भर के कडवे गरम बोल
बना देते हैं पराये
ग्रीष्म ऋतु की दोपहरी के तरह  
मौसम की आवोहवा रिश्तों पर करती है असर

ये संबंधो का अलबेला रिश्ता
सुख-दुख के दामन के बीच
खेलता है, अठखेलियाँ करता है
फिर कभी कभी यही रिश्ता
सावन के मूसलाधार बारिश के तरह
आँखों से झरझराने लगता है
ला देती है अंदर तक नमी
फिर यही बरसता सावन
लाता  है गर्मजोशी
रिस जाता है दर्द
तो सही  है न
मौसम की आवोहवा करती है रिश्तों पर असर !!

दिल्ली फिल्म फेस्टिवल से खींची हुई तस्वीर

Saturday, January 4, 2014

आप बनाम तुम

हार का दंश झेलने मे अगर दर्द न हो तो दलीय प्रजातन्त्र में कोई बुराई ही न थी। कमबख्त ये हार क्या न करवा दे। तभी तो कितनी पार्टियां कुकुरमुत्ते की तरह उग आती है। ककहरे के किसी भी एक शब्द के साथ या पा लगा दो और पार्टी तैयार, आप, बाप, आपा, भाजपा, सपा, बसपा, और पता नहीं क्या क्या ! ये चुनाव ही है जो मुख्यमंत्री बनने वाला होता है वही दूसरे दिन घर पर पता नहीं कहाँ किस दरबे में छिप कर रह जाता है ।

ये राजनीति क्या न करवा दे। एक नौकरशाह रातोंरात अपने को ईमानदार घोषित कर देता है। जिस नौकरी मे बेशक उसने दसियों साल गुजारें हों, वो ये कहने से जरा भी गुरेज नहीं करता की इस सरकारी नौकरी से करोड़ों कमाया जा सकता था पर वो उसको पैर के जूते के नोक पर रखता है। चुनाव के इस सुहाने मौसम मे हर पार्टियां अपना आधिपत्य जमाने के लिए अलग अलग तरह के सोर्स आजमा रही है, तो फिर, क्या दिक्कत है। कोई हाथ पर हाथ मार रहा तो कोई दलदल मे कमल खिला रहा, कोई इतिहास के साथ खिलवाड़ तो कोई नकली ही सही, पर लालकिले पर सवार हो कर अपने को दिखा रहा।

हाँ तो बात किसी खास व्यक्ति की नहीं है, बात केबड़ीवाल की जरा भी नहीं हैं, बात उनके आप की भी नहीं है, बात तो उनके भ्राता श्री जैसी पड़ोसी की है। अरे भैया, हम केवडीवाल के पड़ोसी बनवारीलाल की कर रहे हैं। जो रातोरात केबड़ीवाल से और उनके आप से जल भून कर रह गए । आखिर करे तो क्या करे कुछ दिन पहले तक ही तो दोनों न्यूज पेपर पढ़ते पढ़ते घर के चारदीवारी के पास व्युज देते थे और एक दिन आज है हर कोई आप – आप कर रहा और बनवारीलाल आज भी प्याज टमाटर के दामों से  ही पस्त हैं ।
अंततः आज आखिर पेपर में शीर्षक था

आप बनाम तुम

और बनवारीलाल जी मीडिया के कुछ कैमरे के चकचौध के केंद्र बने चमक चमक कर बता रहे थे। कह रहे थे आदमी का रखवाला आप नहीं तुम हो। तुम में प्यार है, नजाकत है, नफासत है, भोलापन है। तुम से ही पार्टी है, तुम से ही सरकार है, तुम से ही हम भी हैं। तो आऊ बंधुओं तुम से तुम जूडो, तुम को ही आना है, तुम को ही लाना है । बनवारीलाल तुम्हारे साथ है। तुम बानवारी लाल के साथ हो ॥

और फिर जो हुआ, वो होना ही था ...
आप की लुटिया तुम ने डुबो दी
तुम ने सरकार बना दी

तुम बोले तो TUM   “तिकड़मी उलफती मोर्चा” !!!
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बस एक व्यंग्य लिखने की कोशिश, पहली बार !! 


Monday, December 30, 2013

ज्ञान/विज्ञान/स्वाभिमान

DIFF 2013 से खींची हुई पेंटिंग की तस्वीर 


विज्ञान कहता है
ध्वनि के गति के
तुलना में
है प्रकाश की गति
बहुत तेज !!

ज्ञान कहता है
कुतर्क व चिल्लाने से
बेहतर है
तर्क व ज्ञान से
रोशनी फैलाने की कोशिश !!

स्वाभिमान कहता है
डरने/झुकने के बदले
करो, डट कर मुक़ाबला
संस्कार का, स्मिता का
दिया जलाओ !

ज्ञान/विज्ञान/स्वाभिमान
अगर है उनसे जुड़ाव
तो उठो ! बैठो !! जागो !!!
जिंदगी नहीं, ज़िंदगानी बनो
ज्योतिर्मय बनो !

बस यही है चुटकी भर शुभकामनायें !! नए वर्ष की शुभकामनायें !!! 

DIFF 2013 से खींची हुई पेंटिंग की तस्वीर 


Thursday, December 26, 2013

गुलमोहर की सफलता पर आकाशवाणी पर संपादक द्वय (मुकेश कुमार सिन्हा और अंजु चौधरी) का साक्षात्कार



24.12.2013 को सुबह 7.30 पर शब्द-संसार कार्यक्रम के तहत 819 KHz.. (इंद्रप्रस्थ चैनल) (मीडियम वेव लेंथ) पर 30 कवियों की प्रतिनिधि कविताओं के संग्रह 'गुलमोहर' की सफलता पर हम संपादक द्वय (मेरा और अंजु चौधरी) का साक्षात्कार प्रसारित हुआ. जिसमें हमने 'गुलमोहर' के लिए चयन की प्रक्रिया, नये लोगों तक पहुँचने के लिए नए प्रयोगों और सोशल मीडिया के इस पर पड़ने वाले प्रभाव की बात की। उम्मीद है आपको आनंद आएगा और हमें खुशी मिलेगी। गौरतलब है कि इस किताब का प्रकाशन हिन्द युग्म ने किया है। यह किताब सभी ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइटों पर उपलब्ध है।
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कभी कभी अच्छा लगता है, जब एक दम से एक सामान्य से व्यक्ति को कुछ अहमियत मिलने लगे
सुनिएगा !!

Tuesday, December 24, 2013

पगडंडी


अपर्णा के एल्बम से 

कोई नहीं
नहीं हो तुम मेरे साथ
फिर भी
चलता जा रहा  हूँ
पगडंडियों पर
अंतहीन यात्रा पर ...

कभी तुम्हारा मौन
तो, तुम्हारे साथ का कोलाहल
जिसमें होती थी
सुर व संगीत
कर पाता हूँ, अभी भी अनुभव
चलते हुए, बढ़ते हुए
तभी तो बढ़ना ही पड़ेगा ...

मेरे बेमतलब वाली
बिना अर्थ वाली कविता
जैसी ही तो हो तुम !
लोग तो बेवजह
बिना पढे, कह देते हैं “वाह”
मैं स्वयं भी
कहाँ  हो पाता हूँ संतुष्ट
फिर भी, बढ़ना तो पड़ेगा ही ...

बस तुम हो न साथ
अहसासों में
साँसो में
रहना ! रहोगी न !! 


Tuesday, December 17, 2013

साइकल और चाय



रोड-साइड ढाबे पर
तीन साइकल
हीरो, हरक्युलस और एवन के
अगले एक से टायर
थे, एक जगह जुड़े हुए
पर हम थे चार
चल रही थी मंत्रणा
सामने चूल्हे पर उबलती चाय
लो अब आ गई
कटिंग चाय की ग्लास
साथ ही दो समोसे, पर चार हिस्सेदार
और! और !
कालेज के ही सुंदरी के खूबसूरती पर
उसके सादगी पर भी
चल रही थी लंबी बहस
यार !! वो तो पढ़ाई में भी है अव्वल
देखो न कैसे सर की हो गई है चहेती
कुछ तो करना ही होगा
बेशक, उसके लिए पढ़ना ही होगा
ऐसी ही सिरियस बहस के लिए
करनी पड़ती थी पीरियड बंक
चाय की चुसकियों में लगाते थे
लंबा समय हम
बिल पे करने वाला बकरा
हर दिन होता था अलग !!

पर यार! आज भी
उन निरुद्देश्य मीटिंग्स
के सहेजे हुए दृश्य
मानस पटल पर ला देते हैं
खूबसूरत मुस्कुराहट !!

अच्छा लगता है न !!