जिंदगी की राहें

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Monday, December 30, 2013

ज्ञान/विज्ञान/स्वाभिमान

DIFF 2013 से खींची हुई पेंटिंग की तस्वीर 


विज्ञान कहता है
ध्वनि के गति के
तुलना में
है प्रकाश की गति
बहुत तेज !!

ज्ञान कहता है
कुतर्क व चिल्लाने से
बेहतर है
तर्क व ज्ञान से
रोशनी फैलाने की कोशिश !!

स्वाभिमान कहता है
डरने/झुकने के बदले
करो, डट कर मुक़ाबला
संस्कार का, स्मिता का
दिया जलाओ !

ज्ञान/विज्ञान/स्वाभिमान
अगर है उनसे जुड़ाव
तो उठो ! बैठो !! जागो !!!
जिंदगी नहीं, ज़िंदगानी बनो
ज्योतिर्मय बनो !

बस यही है चुटकी भर शुभकामनायें !! नए वर्ष की शुभकामनायें !!! 

DIFF 2013 से खींची हुई पेंटिंग की तस्वीर 


Wednesday, September 4, 2013

ये सेलफोन !


कमबख्त, ये सेलफोन!
जब आया तो लगा
जैसे संपर्क सूत्र बढ़ाएगा..
हर अपने को..
बतियाते हुए
और करीब लाएगा
पर विज्ञान का
एक साधारण आविष्कार..
उस छुरी-चाकू की तरह है
जो काटता है फल..
वो काट सकता है गरदनें..
इस मुए सेलफोन ने
छिन ली मिलने की लालसा..
बस बतिया कर,
पूछ कर क्षेम-कुशल..
रह जाते हैं,
स्वयं को सिमेट कर
खुद अपने ही खोल मे !
जिन रिश्तों के लिए मरते थे
वो अब 'हाय! हैलो!'
 में लगा है मरने..

कहीं ऐसा तो नहीं
कि, इस मोबाइल के
कारण ही रिश्ते भी
लगे हैं रिसने..
मुट्ठी में भरे रेत की तरह
भरभराने लगे हैं...
है न... सच.. कुछ ऐसा ही !!

काश,
सेलफोन-रिचार्ज की तरह
रिसते हुए रिश्ते
भी हो पाते रिचार्ज..
पुल बांधता ये सेलफोन..
ले आता रिश्तों में सामिप्य..

काश!
जैसे तरंगे भर देती हैं
मुर्दे में भी जान..
ठीक वैसे,
सेल फोन की ध्वनि तरंग
से भी, बज उठती मन के भीतर...
आनंद की एक मृदंग..
काश!
हम वाकई महसूस कर पाते

एक मोबाइल की सार्थकता.....