जिंदगी की राहें

जिंदगी की राहें

Followers

Showing posts with label जिस्म. Show all posts
Showing posts with label जिस्म. Show all posts

Wednesday, July 8, 2015

माय चॉइस



स्त्री हूँ
हाँ स्त्री ही हूँ
कोई अजूबा नहीं हूँ, समझे न !

क्या हुआ, मेरी मर्जी
जब चाहूँ गिराऊं बिजलियाँ
या फिर हो जाऊं मौन

मेरी जिंदगी
मेरी अपनी, स्वयं की
जैसे मेरा खुद का तराशा हुआ
पंच भुजिय प्रिज्म
कौन सा रंग, कौन सा प्रकाश
किस परावर्तन और किस अपवर्तन के साथ
किस किस वेव लेंग्थ पर
कहाँ कहाँ तक छितरे
सब कुछ मेरी मर्जी !!

मेरा चेहरा, मेरे लहराते बाल
लगाऊं एंटी एजिंग क्रीम या ब्लीच कर दूं बाल
या लगाऊं वही सफ़ेद पाउडर
या ओढ़ लूं बुरका
फिर, फिर क्या, मेरी मर्जी !

मेरा जिस्म खुद का
कितना ढकूँ, कितना उघाडू
या कितना लोक लाज से छिप जाऊं
या ढों लूँ कुछ सामाजिक मान्यताएं
मेरी मर्जी
तुम जानो, तुम्हारी नजरें
तुम पहनों घोड़े के आँखों वाला चश्मा
मैं तो बस इतराऊं, या वारी जाऊं
मेरी मर्जी !

है मेरे पास भी तुम्हारे जैसे ऑप्शन,
ये, वो, या वो दूर वाला या सारे
तुम्हे क्या !
हो ऐसा ही मेरा नजरिया!
हो मेरी चॉइस! माय चॉइस !!

पर, यहीं आकर हो जाती हूँ अलग
है एक जोड़ी अनुभूतियाँ
फिर उससे जुडी जिम्मेदारियां
बखूबी समझती हूँ

और यही वजह, सहर्ष गले लगाया
दिल दिमाग से अपनाया
आफ्टर आल माय चॉइस टाइप्स फीलिंग
है न मेरे पास भी !!
---------------
माय चॉइस !


Thursday, May 15, 2014

जंतर-मंतर


पार्लियामेंट स्ट्रीट तिराहा 
जंतर मंतर के सामने 
15-20 अभिजात स्त्रियॉं का समूह 
एंटी-एजिंग क्रीम.. लिपिस्टिक से पुता चेहरा 
ओवरवेट.. मांसल जिस्म के साथ 
दे रही थीं बारी बारी से भाषण
कुछ ने चुना गरीबी, तो 
कुछ ने बघारा ज्ञान अशिक्षा पर 
कुछ कह रही थी, कैसे दूर होगा कुपोषण!! 

धड़ाधड़ क्लिक हो रहे थे फ़ोटोज़
दबी जबान में चल रही थी चर्चा
फेसबुक पर डाले जाने वाले अपदेट्स की !
काश इन चूकी सुंदरियों के ज्ञान से
एक भी गरीब कुपोषित बच्चे को
मिल पाता निवाला, बरस पाता ज्ञान
सिद्ध तो हो पाती सार्थकता
इस चिल्ल-पों की
इस एनजीओ के बैठक की..
कोई नहीं, सबसिडी के पैसों से
खरीदी जा चुकी थी
चिप्स और 'बिसलरी'
फिर धरणा स्थल के गहमागहमी की भी
तो थी कीमत !!

चलो कोई नहीं फैशनेबल.. ढल चुकी महिलाएं
हो सकता है कल करें दौरा
कुछ गांवो और कस्बों का
आखिर सिर्फ स्पीच देती तस्वीर में
गरीबी और कुपोषण का रंग भरने के लिए
चाहिए न कुछ बच्चों के भी छाया चित्र
आखिर पाँच कलपते भूखे बच्चों के साथ
सूखती लिपिस्टिक वाली महिला..
किसका न कलेजा कट कर गिर जाये !!

इन दयालू चिप्स खाती..
बिसलरी गटकती स्त्रियॉं के लिए
कुपोषित बच्चों के ओर से
एक मोमबत्ती इंडिया गेट पर
जलना तो जरूर चाहिए
इनके चमकते लिपिस्टिक की कसम
जो दूसरे दिन होंगी
सोशल मीडिया और पेज थ्री की खबर
'महिलाओं ने किया धरना
दिया भाषण
वजह थी, गरीबी, अशिक्षा और कुपोषण !!'
जय हो !!
______________________
वाह रे दोहन, शोषण कुपोषण !!



Wednesday, January 15, 2014

“छमिया”

दिल्ली फिल्म फेस्टिवल से खींची गई तस्वीर
"छमिया" ही तो कहते हैं
मोहल्ले से निकलने वाले
सड़क पर, जो ढाबा है
वहाँ पर चाय सुड़कते
निठल्ले छोरे !
जब भी वो निकलती है
जाती है सड़क के पार
बरतन माँजने
केदार बाबू के घर !!

एक नवयुवती होने के नाते
हिलती है उसकी कमर
कभी कभी खिसकी होती है
उसकी फटी हुई चोली
दिख ही जाता है जिस्म
जब होती है छोरों की नजर
पर इसके अलावा
कहाँ वो सोच पाते हैं
भूखी है उसकी उदर !!

आजकल “छमिया”” भी
जानबूझ कर
मटका देती हैं आंखे
साथ ही लहरा देती है
वो रूखे बालों वाली चोटी
जो छोरों के दिल में
ला देती है कहर
आखिर घूरती आँखों
के जहर
से, वो शायद हो गई
है, बेअसर !!

“छमिया” आखिर समझने
लगी है
मिटाने के लिए भूख
भरने के लिए उदर
जरूरी है ये सफर

अंतहीन सफर !!!   

दिल्ली फिल्म फेस्टिवल से खींची गई तस्वीर