जिंदगी की राहें

जिंदगी की राहें

Followers

Showing posts with label mobaail. Show all posts
Showing posts with label mobaail. Show all posts

Monday, June 21, 2021

सुनहरी बूंद


अलसुबह
मॉर्निंग मैसेज के प्रत्युतर में
पता नहीं कैसे तो
मोबाइल स्क्रीन पर
भीगा सा एक प्रदीप्त चेहरा मुस्काया
कुछ बूंदें छलमलाई
तीखे नयन नक्शों के ऊपर
छिटकते हुए
बूंदों ने टकरा कर सोचा पर वे कह नहीं पाए
हाय ये कैसा विघटन जल के संयोजन का
ऑक्सीजन की लहराती दरिया
छितरा गयी गालों पर
जबकि डिम्पल पर लटकते हुए हैड्रोजन मुस्काया
देवी तुमने हमें आजाद करवाया !

तब तक कुछ और बूंदों ने
जो इतवार के बहाने से
कुछ ज्यादा ही देर तक सोते रहे थे
कुछ देर से जग कर
चकमक चेहरे वाली बाला
जो जस्ट चेहरे को धो कर निहार रही थी आइना
उसके ही
लहराते लटों से ठुमकते हुए छिटके
कह उठे अलसाए आवाज में
झाँक ही लो मुझमें
मेरे प्रिज्मीय अपवर्तन और परावर्तन के वजह से
तुम कह सकते हो
है ये बाला - चंचल चितवन, स्नेहिल और खूबसूरत !

जिंदगी बहती है और बहते हुए ही जाना है
भरे हुए आँखों वाली के
पलकों से ठिठक कर एक सुनहरी बूंद ने कहा
नहीं जान देना है मुझे
प्लीज एक बार पलकों को हौले से समेटो
ताकि
जैसे हो तुम आगोश में
और मैं यानी बूँद समा जाऊं तुम्हारे ही नजरों में

खोना पाना भी तो शायद प्रेम ही है न !
क्या ऐसा सम्भव नहीं है क्या।

~मुकेश~