जिंदगी की राहें

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Sunday, March 13, 2016

ईद मुबारक


सुनो
कल आँखे मिचमिचाते
भोर के किरणों से पहले
जैसे ही उठूं बिस्तर से
सामने हो जाना तुम !!
कल ईद है न
मेरी ईद, सूरज के किरणों सरीखी
तुमसे हो
बेशक सामने फहरा देना अपना आँचल या
लहरा देना जुल्फें
ताकि लगे दूज का चाँद या है सूरज !!
समझी न !!
जल्दी समझ जाती हो !!

ईद मुबारक !!

13 मार्च 2016 के लोकमत समाचार के सभी संस्करणों में मेरे "हमिंग बर्ड" की एक तथ्यपरक सुन्दर समीक्षा प्रकाशित हुई !




Thursday, September 10, 2015

हमिंग बर्ड की फ़रियाद



हम्म हम्म !
इको करती, गुंजायमान 
हमिंग बर्ड के तेज फडफडाते 
बहुत छोटे छोटे पर  !

फैलाए पंख 
सूरज को ताकती सुर्ख चोंच 
तो, कभी फूलों के 
रंगीन पंखुड़ियों के बीच 
ढूँढती पराग कण !!

सूर्योदय की हरीतिमा 
बता रही अभी तो बस 
हुई ही है सुबह 
नीले बादलों भरा आकाश 
ताक रहा उसे, जैसे 
कह रहा हो ...

अभी कहाँ आराम बदा है 
अभी तो मीलों हमको, मीलों हमको चलना है !!

कभी उलझते पाँव 
तो, कभी झाड़ियों में 
फंसते पंख 
या कभी बहेलियों के जाल में फंस कर 
हो जाते है विवश 
करना होता है 
उड़ान का स्थगन !!

टुकुर टुकुर ताकती चिरैया 
निहारती 
आकाश, मेघ, हवाएं, रौशनी !!
इन्द्रधनुष का सतरंगा संसार भी 

शायद इस छुटकी चिरैया की भी 
डबडबाती है आँख 
शायद उसने कहा 

प्लीज, अभी और उड़ना है 
नापना है आकाश 
बटोरना है पराग 
जाने दो न !

पर चिरैया के सपने पुरे हों 
जरुरी तो नहीं 

उलझने, झाड़ियाँ, बहेलियाँ 
कम तो नहीं !!
___________
हमिंग बर्ड की फ़रियाद :)




Tuesday, June 16, 2015

ऐसा ही प्यार


हूँ मुग्ध तुझ पर
जैसे दूर से आती
'कस्तूरी' की सुगंध
जो कभी भी नही आती पास
है तमन्ना तेरी ही
ऊपर नीचे होती साँसों में खोंने की
उस 'गुलमोहर' के पेड़ तले
ताकि लाल पंखुड़ियाँ गिरे टप से
तेरे चेहरे पर, मेरी नजरों के सामने
है लालसा तेरे हरपल
सान्निध्य की स्पर्श की
चाहत तेरे रक्तिम होंठो की
हाँ, बेशक खो जाऊं 'पगडंडियों' में
बस ऊँगली उलझी हो तेरे साथ
पुकारूं तुझे
और, बस 'गूँज' उठे फलक
'हमिंग बर्ड' के जूँ करती
धीमी सी आव़ाज
और तेरी छमक से
हो ऐसा ही बस आगाज
तुम चलों
'तुहिन' से नम भींगे घास पर
वो भी नंगे पाँव
ताकि मैं निहारूं उन धब्बों को
जो बनाते बढ़ जाओ तुम
हाँ मर ही जाऊं
तो हो जाऊं तृप्त
तेरी बाँहों में
तेरे ख्यालों में
तेरी बातों में......
------------------
हमिंग बर्ड, कस्तूरी, पगडंडियाँ, गुलमोहर, गूँज और तुहिन मुझ से जुडी किताबें जो मेरे अन्दर कहीं आत्मसात हैं, तुम्हारे तरह ही !!



Monday, March 23, 2015

ब्लॉग यात्रा



ऑरकुट के समय, लोगो को देखादेखी 2008 में ही ब्लॉग बना लिया था,  हिंदी का 'ह' भी नही आता था उन दिनों, पर ब्लॉग के नाम "जिंदगी की राहें" के अनुरूप पगडण्डी जैसी राह ही बनती चली गयी!

चूँकि ब्लॉग बना तो पोस्ट भी जरुरी है! और फिर जिस भी ब्लॉग पर उन दिनों नजर पड़ी वो कवितायें ही लिखते थे ! इस वजह  मन में ये धारणा बन गयी की ब्लॉग पर सिर्फ कवितायें ही पोस्ट किये जाते हैं ! हम भी तुकबन्दियाँ जोड़ने लगे ! कुछ मेरे मेंटर या हमदर्द उसपर वाह या बहुत खूब लिखते, सीना चौड़ा हो जाता !

एक बार किसी चर्चा या ब्लॉग बुलेटिन पर मेरी पोस्ट आयी,  हमें तो ऐसे फील हुआ जैसे हंस या पाखी के संपादक मेरे घर से मेरी रचना ससम्मान ले गये हों !!

गिव एन टेक का ज़माना उस समय भी था, कुछ पोस्ट पर सचिन के तरह कमेन्ट का सैकड़ा लग गया !! फिलिंग अशोक वाजपेई जैसी जन्म ले ली !! वो अलग बात है करीब डेढ़ लाख की ट्रेफिक मेरे ब्लॉग पर अब तक है 382 फोलोअर हैं !

हाँ भूल गये, रश्मि दी ने एक कविता 2010 में संकलन में प्रकाशित करवा दी ! :-D साहित्य के पुरौधा ही बन बैठे !!

हाँ सच कहता हूँ, जोड़ तोड़ नही किये, पर हिंदी ब्लोगर का अंतर्राष्ट्रीय सम्मान रविन्द्र प्रभात जी के वजह से 2011 व 2012 में वर्ष के सर्वश्रेष्ठ युवा कवि के रूप में मिला :-) :-D !! हँसते मुस्कुराते रोते सफ़र चलता रहा !

अंजू चौधरी से मित्रता हुई एक अलग रास्ता मिला व देखा ! जिसकी खुद की रचनाओं में ढेरों व्याकरण की गलतियां होती है उसने सह संपादन में कस्तूरी पगडंडीयां व गुलमोहर जैसी तीन साझा संग्रह लाने की गुस्ताखी की ! इनमे करीबन सौ नये पुराने रचनाकार जुड़ चुके! प्रत्येक संग्रह की 500 से ज्यादा प्रतियाँ लोगो के हाथों तक पहुंची!

साला! वो दिन भी आ गया, जो गहरी नींद में देखा करते थे ! 'हमिंग बर्ड' की फुदकन सोलो संग्रह के रूप में सितम्बर में प्रकाशित हुआ! अगर भिखारी को एक हजार का नोट पकड़ा दे तो वो एक एक पैसे का वेल्यु समझेगा ! वैसा ही हुआ जो सोचा नही था वो मिला! हमने भी दोस्ती जिंदाबाद के नारे के साथ ऐसी कोशिश की कि 600 प्रति का पहला संस्करण ख़त्म हो कर पुनर्मुद्रित संस्करण आ चुकी है !! जियो दोस्तों :-)

अब करीब 60 नये पुराने प्रतिष्ठित रचनाकारों के साथ 'गूँज' व 'तुहिन' के नाम से दो सम्मिलित कविता संग्रह इन्फिबिम पर सिर्फ 105 रूपये में प्री बुकिंग पर है जिसका विमोचन 4 अप्रैल को संध्या 5 बजे हिंदी भवन में होना निश्चित हुआ है !! आइयेगा न !!
------------------------
"जिंदगी के राहें" के साथ समय समय पर मिलें दोस्तों , तुम्हारा शुक्रिया !

आगे भी साथ चलना प्लीज :-)
जिंदगी की राहें

Friday, January 30, 2015

तृष्णाओं का अभ्यारण्य


चलो चलें
तृष्णाओं के अभ्यारण्य में
करेंगे शिकार
कुछ दबी कुची, कुम्हलाती
झाड़ियों के बीच से उछलती 
इच्छाओं के बारहसिंघे का
दिन ढलने से पहले !!
वो देखो,
नाच रहे उम्मीदों के मयूर
करें उनका भी आखेट
बांधें निशाना बस चूक न जाएँ
ताकि चमकती उम्मीदों का
मयूर पंख
सुशोभित हो
मेरे घर की दीवार पर!!
उन जंगली फूलों पर
फड़फड़ा रहे,
छुटकू सपनों से
हमिंग बर्ड !
क्या उन्हें भी ??
न ..न !! रहने दो बाबा
हो चुकी अब स्याह रात
झपकते पलकों में
देखने हैं सतरंगे सपने
छोडो इस चिरैये को !!
कल फिर कर्रेंगे वध, इस घने जंगल में
अरमानों के घोड़े पर होकर सवार
भावनाओं के तेंदुएं का
थोडा द्वन्द, थोडा मल्ल युद्ध !!
उसके बाद होगा थोडा दर्द
प्लीज़िंग पेन जैसा!
इसलिए तो बार बार
निकल पड़ता हूँ, प्रकृति की छटा में
सैर के बहाने, लविंग इट यार !
तुम भी चलना !
चलोगे ना, अभ्यारण्य?


Monday, October 27, 2014

बिग बॉस


था गहरी नींद में सोया
या कि
था किसी ख्बावो में खोया
यूँ कि एकदम से कड़कती आवाज
कानों में गूंजी
- बिग बॉस चाहतें हैं कि
कॉन्फेशन रूम में आयें मुकेश !!
चिहुंका मैं, ठिठका मैं
याद नहीं उठा भी कि
एवें बस पलकें झपकी
या उठा तो किस कमरे में गया मैं?
गया तो फ्रिज का दरवाजा खोला
या कि मुख्य द्वार खोल कर
कि बाहर निकलने की कोशिश
शायद हो चुकी थी देर
तभी तो, फिर से वही रौबदार आवाज
गूंजी या समझो चीखी
"मुकेश"
बिग बॉस आपके "हमिंग बर्ड" के
बेस्ट सेलर बनने की बधाई देते हैं...
अविस्मयकारी स्थिति के साथ
पलकें झपकी, होंठ थरथराये
कांपती आवाज में कह ही उठा
थैंक यू - बिग बॉस!!
फिर से वही कौंधती आवाज
आप खुश हैं, संग्रह के प्रदर्शन से
हमिंग बर्ड की उड़ान से ?
क्या आपको लगता है
जिन हाथों तक चाहते थे पहुँचाना
उन हाथों तक ये किताब पहुंची...?
एक दम से उड़ गयी नींद
खुद ब खुद आवाज रुंध गयी
भरे गले से मेरी आवाज निकली
जी, उम्मीद से बढ़ कर
मिला रेस्पोंस
पर उम्मीद फिर भी है कायम
अब आप जा सकते हैं मुकेश !
ये आवाज फिर से कौंधी पर
मेरी नींद की ठुमकती चिरैया को
एक अनूठे सपने ने उड़ा दिया था
साथ ही, मुस्कराहट तैरा दी होंठो पर
इस प्यारी सी हमिंग बर्ड ने...
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काश ये सपना भोर का होता, ये सपना सच्चा होता 😊
मोरल ऑफ़ द पोएम : जो भी इस बेवकूफी भरी रचना को पढ़े वो मेरी हमिंग बर्ड को जरुर पढ़े, जरुर आर्डर करे  :-)
इंतजार रहेगा...... :-)


Thursday, September 18, 2014

प्रेम कविता ....



मोटी, मत खाया करो भाव
मांसल भरे देह के साथ
हो गयी उम्र तुम्हारी
थोड़ी खुबसूरत  ही तो हो
तो, तो क्या हुआ
मुझे तो अभी भी
तुमसे आती है भीनी सी खुशबू
सुरमई रातों वाली
कविता जैसी !!

जब देखो छिटक देती हो
मेरा हाथ
कह देती हो एक पल में
बेशर्म ! परेशान करता है
शरम नहीं आती
पर क्यों नहीं देख पाती
अपनी कजरारी आँखों से
मेरी मदहोश आँखों में
उस ध्रुव तारा से आने वाले
ठंडे प्रकाश जैसा नेह
कुछ प्यारी सी बहती हुई गजल जैसी !

हुंह, जाओ !
समझ गया, नहीं है तुम्हे प्यार व्यार
थोड़ी बालपन सी ठुनकन
क्यों न दिखाऊं
आखिर
भींगते आकाशों का सुख
और ठंडी गुनगुनी धुप
दोनों तो रचा बसा है तुममे
गद्य और पद्य दोनों विधाओं का
प्रेम से भरा तुम में
पढने दो न ये किताब मुझे
उफ़ कुछ तो कहो
मान जाया करो न
ए प्रेयसी!
___________________
क्या इसको प्रेम कविता कहेंगे ?

(मेरी कवितायेँ, ऐसी ही हलके फुल्के शब्दों से जुड़ते हुए बनती है ..............ऐसी ही, बहुत सारी आम लोगो से जुडी कविता के लिए आर्डर करें हमिंग बर्ड :)


Monday, September 8, 2014

हमिंग बर्ड : कभर पेज



मैंने नहीं देखी है ....... 
"हम्मिंग बर्ड" ! अब तक !!
तो, क्या हुआ ?
मैंने तो प्यार व दर्द भी नहीं देखा 
पर, फिर भी, लिखने की कोशिश कर चूका उन पर भी .....
______________________
मेरे अन्दर के छपने की उत्कंठा ने आखिर रंग दिखा ही दिया ... 
आखिर मेरा आने वाला पहले कविता संग्रह "हमिंग बर्ड" का कभर पेज तैयार है !!
आज अनंत चतुर्दशी के दिन, जो हिंदी रीति से मेरा जन्मदिन भी है, को इस कभर-पेज को आप सबके साथ शेयर करता हुआ "टॉप ऑफ़ द वर्ल्ड" फील कर रहा हूँ !! 
काश ये संग्रह कुछ लोगो के टेबल तक पहुँचने में सफल रहे 
इन्ही उम्मीदों के साथ ......... आप सबके स्नेह का आकांक्षी !!


Wednesday, April 16, 2014

आवाज


कभी सुना
आवाजें मर गई ?
आवाज तो,
सन्नाटे को चीरती है
बहते मौन हवाओं के बीच
हमिंग बर्ड की तरह..
आवर्ती गति के साथ आगे बढ़ती है
सन्नन्नन्न की गूँजती आवाज़ !!
.
सुनो!
अगर मेरे जाने के बाद
कभी भी
सुनना चाहो मेरी आवाज
मेरी स्मृतियों की खनखनाहट से
तो, लगा देना अपनी कान
फिर उस गुड-गुड करते शोर को
ब्रेल लिपि सी कुछ लिपिबद्ध कर के
अनुभव करने की करना कोशिश
देखना..
मेरी आवाज और मैं
मिलेंगे, बहुत पास ही
बस महसूस करना
और उन पलों में एक बार फिर
जी लेना मुझे...
~मुकेश~