जिंदगी की राहें

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Thursday, April 25, 2013

मैं शर्मिंदा हूँ !














हाँ मैं शर्मिंदा हूँ !
क्योंकि मैं पुरुष हूँ, क्योंकि मैं भारतीय हूँ
हाँ मैं शर्मिंदा हूँ !
क्योंकि मैं निवासी हूँ उस शहर का
जहां महफूज नहीं है, "मासूम बच्ची" भी  
हाँ मैं शर्मिंदा हूँ !
क्योंकि पहले मैं शान से अपने
बिहारी होने पर करता था गर्व
क्योंकि ये भूमि
सीता-बुद्ध-महावीर-गुरु गोविंद की भूमि थी
बेशक लचर शासन व्यवस्था/ साक्षरता ने
हमारे बिहार को बना दिया सबसे गरीब
पर हम बिहारी कभी दिल से गरीब नहीं रहे  
पर, आज ये भूमि
खूंखार बलात्कारियों
की जन्मभूमि कहला रही है
हाँ मैं शर्मिंदा हूँ !

(ये बात दिल को लगती है, और बुरी भी है... जो बिहार आज भी सबसे ज्यादा प्रशासनिक अधिकारी भारत को देता है, जो देवो की भूमि रही है, वहाँ से पैशाचिक बलात्कारी पकड़े जा रहे हैं।)

37 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

दुखद देश हो गया पुनः से..

इस्मत ज़ैदी said...

इस के लिये आप अकेले ही शर्मिंदा नहीं हैं बल्कि हम सब शर्मिंदा हैं क्योंकि ये मुजरिम किसी एक राज्य का सर नहीं झुका रहे हैं पूरा देश उन के इस घृणित कृत्य पर शर्मिंदा है
चंद सिफिरे न ये कि बच्चियों की ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं बल्कि अपने ही देश का सिर भी झुका रहे हैं

नीलिमा शर्मा said...

आज ये भूमि
खूंखार बलात्कारियों
की जन्मभूमि कहला रही है
हाँ मैं शर्मिंदा हूँ !



SAMSAMYIK ..... MARMIK....AAP KYO SHARMINDA HO ..... SHARMINDA KARNE WALO NE POORE VISHW KI SAMNE SABKA SAR JHUKA DIYA HAIN

Sadhana Vaid said...

बेहद दुखद एवँ शर्मनाक ! हर भारतीय क्षुब्ध, कुंठित एवँ शर्मिन्दा है !

ANULATA RAJ NAIR said...

पूरी इंसानियत ही शर्मिंदा है..क्या आप क्या मैं...
:-(

अनु

अरुणा said...

पूरा देश बेहद शर्मिन्दा है ........

बहुत अच्छी अभिव्यक्ति आपकी .......

Bhavna....The Feelings of Ur Heart said...

aapke saath sath har wo bhartiya jis mein sharam baki hai wo sab sharminda hain

Truth or Dare said...

सिर्फ आप ही नहीं पूरा देश शर्मिंदा हैं ....दर्द भरी रचना .....

shikha varshney said...

शर्मिंदगी से ज्यादा जरूरत सोचने की है. अभी भी नई पीढी हमारे हाथों में है. पाजिटिविटी डालिए उनमें.कम से कम १० साल बाद का समाज तो सभ्य कहलाने लायक होगा.

Rajendra kumar said...

बहुत ही मार्मिक प्रस्तुतीकरण,देश के हालात पर रोना आता है.

विभा रानी श्रीवास्तव said...

हाँ मैं भी शर्मिंदा हूँ .....
लेकिन दोष नहीं हमारा ....
हर हाल में दोषी शराब होता है
सुशासन काल में सबसे ज्यादा
शराब की दुकान खुली है .....
हाँ मैं भी शर्मिंदा हूँ .....

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

दुखद स्थिति है ...पर शर्मिंदा तो सब ही हैं ... कितना पतन होना है ...

Tamasha-E-Zindagi said...

शर्मिंदगी तो सभी को है आप अकेले नहीं है | पूरी इंसानियत और समस्त पुरुष जाती आज इस दुखद घटना पर शर्मिंदगी महसूस कर रही है | पुरुष होने के पुरुषत्त्व पर प्रश्न चिन्ह लग चूका है | यदि अभी कोई ठोस कदम न उठाया गया तो न मालूम आगे क्या होगा | रचना गहन अर्थ लिए हैं और ये मुद्दा बहुत ही गंभीर और विचारणीय है |

कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
Tamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page

nayee dunia said...

दरिंदों की कोई जात -मजहब नही होता और वह किसी भी देश -प्रदेश का वासी नहीं होता , यह तो एक पैशाचिक भावना है ...
और पुरुष जाति क्यूँ शर्मशार हों , वह पिता भी तो है भाई भी है ....

अरुन अनन्त said...

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शुक्रवार (26-04-2013) के चर्चा मंच 1226 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

Sumit Pratap Singh said...

ऐसे पिशाचों को जिन्दा गाड़ दीजिए फिर जिन्दा होने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी...

Anju (Anu) Chaudhary said...

अपने आप को दोष देना उचित नहीं है

थोड़े-थोड़े हम सब दोषी है

अज़ीज़ जौनपुरी said...

बेहद दुखद एवँ शर्मनाक

विवेक रस्तोगी said...

ये सामाजिक कारण हैं इसके लिये पूरा समाज जिम्मेदार है, और पूरा समाज भी आज शर्मिंदा है।

Unknown said...

yeh kisi vyakti vishesh ya pradesh vishesh ki baat nhi hai ..yeh baat hai maanvata ki jo ab rahi hi nhi kisi mein bhi ...iss dukhad ghatna ke liye poora desh hi sharminda hai :(

yashoda Agrawal said...

आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 27/04/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

Satish Saxena said...

दुखद...

मुकेश कुमार सिन्हा said...

Vibha Tiwari: agar Apke Shareer ka koi hissa
keechar me san jae to aap khud ko
"keechar ka keera " kaise maan sakte hai?

.
keechar ko turant dho kar aap pavitra ho jate hai.
Aap Ganga jal se seeche hue pavitra tulsi hai.

.

fir Kisi "GALAT MAANSIKTA WALE " INSAAN KE kAARAN POORE
"rajya" ye "Desh" Ya "Purush Jati" ko kyo Blame karna?
RAAVAN ka saga bhai "Vibhishan "tha.
usne bhi Sharmindagi me ye maan liya hota ki mere bhai ne "Jagadamba" ka Aapmaan kiya hai.
....
mai Sharminda hoon.
....
to Raavan ko kabhi nahi Mara ja sakta tha.

.
hum jin desho ko Apna AAdarsh mane Baithe hai
unke to President/Rastrapati bhi Characterless/Charitraheen nikle hai.

मुकेश कुमार सिन्हा said...

Manoj Istwal : chalo kamse kam us bihaar se ek vyaktitwa ne apne bihaari bhaaiyon ki kaali kartooton par apne ko sharminda mahsoos kiya..heads off for u

Kailash Sharma said...

बहुत दुखद...

सदा said...

बेहद दु:खद ....

Manav Mehta 'मन' said...

marmik

Manav Mehta 'मन' said...

marmik

ब्लॉग बुलेटिन said...

आज की ब्लॉग बुलेटिन गणित के जादूगर - श्रीनिवास रामानुजन - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति!
मैं आपकी भवनाओं को समझ सकता हूँ!
साझा करने के लिए धन्यवाद!

कालीपद "प्रसाद" said...

behad dukhad , iska hal ham sabko miljulkar dhudna bai

latest post बे-शरम दरिंदें !
latest post सजा कैसा हो ?

Onkar said...

हाँ, यह स्थिति चिंताजनक है

सु-मन (Suman Kapoor) said...

कब सुधरेंगे ये हालात ..आखिर कब

नूपुरं noopuram said...

pata nahi wo kaisi manasikta hai jo nanhi bachchiyon ko dekh kar inke man mein aise vikrat bhaav aate hain. kya ham samay rahte inko pehchaan kar inhen dushkarm karne se rok nahi sakte ?

मुकेश कुमार सिन्हा said...

SAURABH SINGH: 25 Apr 2013
very true mukesh g bihar ke hi nahi har purush ko sharminda hona chahiye in ghatnao se to aise logo ko pakade jane ke baad fasi nahi deni chahiye salo ko chaurahe pe bandh ke khada kar do aur pure sharir pe jhakhm bana do aur janta ko boll do ki namak aur laal mirch ragade un jakhmo pe tabhi baki logo ke dilo me iska darr baithega warna ye paap aur badhta jayega hindustan me

मुकेश कुमार सिन्हा said...

Alka Gupta: 25 Apr 2013+2
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Reply
पुरुष ! तुम ही क्यों हो शर्मिंदा !
तुम तो एक नारी के बेटे हो |
या फिर हो तुम भी पिता बेटी के |
एक बहन के भाई भी तो हो तुम ही |
पति प्रेमी या बहुत कुछ तुम ही तो हो |
रिश्तों में हो आत्मीय बहुत सारे ...|
मेरे अपने .....मेरे लाडले सपने |
कदम बढालो ....साथ मेरे |
संस्कार ले लो बस साथ अपने |
सम्मान से भर लो आँख अपनी |
देवी नहीं ...केवल इंसान मानो |
इंसान मानो अपने जैसा ही |
सम्मान करो भावनाओं का भी |
उसे तन नहीं ...मन भी मानों |
जो इंसान नहीं होते हैं ....
चाहें वह मन का हो या तन का |
वह तो हर रिश्ते को छलते हैं |
घायल तो हर कोई होता है |
जो जुड़ा है होता एक नारी से
आखिर वह भी तो उसका ही ....
पिता भाई बेटा होता है |
बालात्कार पुरुष नहीं दरिन्दे हैवान करते है |
पुरुष तो हर नारी के ह्रदय में ही बसते हैं ||

---------------------अलका गुप्ता -----

Vaanbhatt said...

जब राजधानी का हाल शोचनीय हो...तो जिलों कस्बों की बात ही कहाँ...