Monday, April 3, 2017
खास उम्र की महिलाएं
Tuesday, March 21, 2017
एलोवेरा
हाँ, एलोवेरा के सिंदूरी फूल सी ही
लगती हो ‘तुम’
बिना भीगे प्यार
बिन खाद-दुलार
कंटीले से पौधे में भी
हरे-भरे अजब से माँसल
पत्तों के बीच
सहज सरल सम्मोहन संग
हर बार जब भी खिली खिली सी
दिखी तुम
औषधि सी तुम
हाँ ज़रा सी तुम
पुरअसर बेजोड़
दिलोदिमाग पर काबिज़
न जाने कब तक के लिए
शायद अब सांस भर
पकी उम्र की दरकार बन
लम्बे समयांतराल में
चमकती हो तुम .....!
सम-विषम परिस्थिति में
बिना जद्दोजहद
एलोवेरा को अपनी है कदर
इसलिये है अपनी फिकर
स्व को स्वीकार कर ही
संभव है परजन हिताय
ज़िंदगी के अभ्यारण्य में
एलोवेरा पुष्प सी प्रेरणा बन
अवतरित होती हो तुम
लम्बी छरहरी चमकीली, आल्हादित कर देने वाली
सिंदूरी रंग में सजी तुम
जीवन की चमक लिये
तुम हाँ तुम ही तो
एलोवेरा की फूल सी तुम
सुनो
यूँ तो हरवक्त नजर नहीं आती
पर, जब भी दिखती हो
छाई सी रहती हो दिलो दिमाग के गलियारे में
वैसे पता तो है ही तुम्हे
फिर भी सुनो
मैं चाहता हूँ
एलोवेरा तुम्हारा वर्चस्व बना रहे
पुष्पित हो
नसों से साँसों तक
दिलोँ से दिमाग़ तक
दुनिया से दुनियादारी तक
हर वक़्त हर जगह ......!!!
Monday, March 6, 2017
चीटियाँ
जा रही थी चींटियां
गुजर रही थी भरे बाजार से
शायद किसी मिष्ठान भंडार की ओर
पर थी पंक्तिबद्ध
हर एक के पीछे एक !
तल्लीनता और तन्मयता से भरपूर
कदम दर कदम, सधे क़दमों से
'रुके नहीं, थके नहीं' के आह्वान के साथ
जबकि कई-एक बार
किसी न किसी इंसान ने
कर ही दिया जूतों तले मर्दन
की कोशिश कि टूट जाए अनुशासन
कुछ हो गईं शहीद चींटियों को छोड़
बढ़ रही थीं सभी, ऐसे, जैसे कह रही हों
वीर तुम बढे चलो
सिंह की दहाड़ हो ..!
रुके नहीं कभी कदम
थी कुछ अपवाद इन में भी
लगा ऐसे, जैसे है कुछ में नेतृत्व की क्षमता
तभी तो उनमें से कुछ
लम्बे डगों के साथ
कतारबद्ध बढ़ते चीटियों पर
छलांग कर/फलांग कर बिना पक्तियों को तोड़े
बढ़ रही थीं सबसे आगे।
हाँ, इन्हीं में से कुछ को निकलेंगे 'पर'
इन्हीं फड़फड़ाते परों के साथ
उड़ निकलेंगे जौहर दिखाने की कोशिश के साथ
पल भर में मर कर, गिर कर समझा देंगी ये सबको
घातक है पंखों का फड़फड़ाना!
याद रखना
है अगर नेतृत्व क्षमता
है अनुशासन
है निष्ठा
तो बढ़ते रहोगे आगे
बहुत आगे
बस, फड़फडाना मना है !
~मुकेश~
Tuesday, February 28, 2017
आइना
आईने के सामने खड़ा अकेला व्यक्ति
एकांत का प्रतिरोध करने की
एक वाजिब सी कोशिश के साथ !!
वो और उसका प्रतिबिम्ब
जैसे दो बचपन के यार
जैसे एक और एक दो नहीं
हो जाएँ ग्यारह, ऐसी हो उम्मीद !!
होता है न सच्चा और सार्थक
एक ऐसे शख्स का साथ
जो होता है स्वयं जैसा
एक जैसे गुण, दुर्गुण सद्गुण के साथ !!
यानि हँसे तो वो भी मुस्काया खिलखिलाया
रोये तो उसने भी मुंह बनाया, टपकाए आंसू !!
आता है प्यार, उस पर, जो होता है
आईने के उस पार !
जो करते हैं खुद को प्यार
उन्हें आईने में दिख जाता है
हमसफ़र, हमदम हमनजर !!
मतलब, जैसे आईने के सामने वो बुदबुदाया
- 'लव यू'
तो लगा ऐसे, जैसे सामने से होंठ हिले
दर्पण के उस पार
हमशक्ल ने कहा 'सेम टू यू' !!
Thursday, February 16, 2017
"विंड चाइम"
कल ही ख़रीदा है एक 'विंडचाइम'!
Wednesday, January 18, 2017
आइना झूठ नहीं बोलता
है वो चश्मदीद गवाह
कटघरे में खड़े अभियुक्त जैसे
अपने सामने दिख रहे चेहरे के लिए
जो बता पता है, या यूं कहें, बता सकता है
अपराध से अभियुक्त का कोई वास्ता नहीं
बेशक हो 'एलीबी'
अपराध न करने की,
लेकिन कहते हैं न
झूठ के हज़ार मुंह
और एक चुप सच का
जानने समझने के लिये
उतरना पड़ता है
आँखों की गहरायी में
महसूसना पड़ता है
पनियल आँखों की तराई को
जिससे नज़रों का
परावर्तन/अपवर्तन
जोड़ पाये कुछ दरकते बंध
मैंने खुरच दी है
तुम्हारे दूसरे तरफ की
सिल्वर सुरमई कलई
जिससे खुल न पाये कलई
तुम्हारी गवाही से
ताकि डाल सकूँ खुद की आँखों में आँखें
बेपरवाह बिंदास ..
डरता हूँ तुमसे ...
तुम्हारी सच्चाई से
कह सकते हो कभी भी
हर व्यक्ति
होता है गुनाहगार
कमियों के भण्डार तुम भी कम नहीं
जानते हो ने
कितनी कमज़ोर है तुम्हारी याददाश्त
और उल्टा ही दिखाते हो
मेरा सीधा हो जाता है तुम्हारा उल्टा
इतना आसान भी तो नहीं
Tuesday, December 20, 2016
कहीं इमरोज न बन जाऊं
होती हैं जवां,
दो नादाँ खुशमिजाज और चहकते दिलों में
हिलोरे मारती है चाहतें
शायद हो कोई जूलियट, लैला या रांझा
जो थामे उसके हाथों को
और प्यार भरी नजरों से ताकते हुए कह भर दे
वही घिसे पिटे तीन शब्द
आई लव यू !
या देर से उछला प्रेम स्पंदन
या यूँ कह लो
प्रेम भरी साहित्यिक कविताओं का
नामालूम असर
कहीं अन्दर से आई एक आवाज
चिंहुका प्रेम उद्वेग
हो मेरे लिए भी कोई अमृता -
जो मेरे पीठ पर नाख़ून से
खुरच कर लिख सके
किसी साहिर का नाम!









