जिंदगी की राहें

जिंदगी की राहें

Followers

Showing posts with label सचिन. Show all posts
Showing posts with label सचिन. Show all posts

Saturday, August 4, 2012

अख़बार

ब्लॉग्गिंग के शुरुआत के समय की ये रचना..... पिछले पोस्टस देख रहा था, तो एक दम से अच्छा लगा... बेशक तुकबंदी है ... पर मुझे खुद को अच्छी लगी... तो शेयर कर रहा हूँ....!!!
















दिन था रविवार,
सुबह की अलसाई नींद
ऊपर से श्रीमती जी की चीत्कार...
देर से ही सही, नींद का किया बहिष्कार
फिर, चाय की चुस्की, साथ में अख़बार
आंखे जम गई दो शीर्षक पर
"दिल्ली की दौड़ती सड़क पर, कार में बलात्कार"
"सचिन! तेरा बैट कब तक दिखायेगा चमत्कार"


सचिन के बल्ले के चौके-छक्के की फुहार
हुआ खुशियों का मंद इजहार
दिल चिहुंका! हुआ बाग-बाग! चिल्लाया॥
सचिन! तू दिखाते रह ऐसा ही चमत्कार
कर बार-बार! हजारो बार......

तदपुरांत, धीरे धीरे पलटने लगा अखबार
पर, तुरंत ही आँखें और उँगलियों ने किया मजबूर
आँखे फिर से उसी शीर्षक पर जा कर हो गयी स्थिर
एक दृश्य बिना किसी टेक-रिटेक के गयी सामने से गुजर 
सोच भी गयी थम!
आँखे हो गयी नम!!


उसी दिल से, वहीँ से, उसी समय
एक और बिना सोचे, समझे, हुआ हुन्कार
क्या
क्या ये भी होगा बार-बार!! हजारो बार..
क्या ऐसे ही महिलाओं की इज्जत होगी तार-तार.....
आखिर कब तक.....................!!!!!!!!!!!!!!!


Tuesday, March 16, 2010

~अख़बार~







दिन था रविवार,
सुबह की अलसाई नींद
ऊपर से श्रीमती जी की चीत्कार...
देर से ही सही, नींद का किया बहिष्कार
फिर, चाय की चुस्की, साथ में अख़बार
आंखे जम गई दो शीर्षक पर
"दिल्ली की दौड़ती सड़क पर, कार में बलात्कार"
"सचिन! तेरा बैट कब तक दिखायेगा चमत्कार"
.

सचिन के बल्ले के चौके-छक्के की फुहार
हुआ खुशियों का मंद इजहार
दिल चिहुंका! हुआ बाग-बाग! चिल्लाया॥
सचिन! तू दिखाते रह ऐसा ही चमत्कार
कर बार-बार! हजारो बार......
.
तदपुरांत, धीरे धीरे पलटने लगा अखबार
पर, तुरंत ही आँखें और उँगलियों ने किया मजबूर
आँखे फिर से उसी शीर्षक पर जा कर हो गयी स्थिर
एक दृश्य बिना किसी टेक-रिटेक के गयी सामने से गुजर
सोच भी गयी थम!
आँखे हो गयी नम!!
.
उसी दिल से, वहीँ से, उसी समय
एक और बिना सोचे, समझे, हुआ हुंकार
क्या ये भी होगा बार-बार!! हजारो बार॥
क्या ऐसे ही महिलाओं की इज्जत होगी तार-तार.....
.
.
आखिर कब तक...........!!!!!!!!!!!!!!!