जिंदगी की राहें

जिंदगी की राहें

Followers

Showing posts with label रिश्ता. Show all posts
Showing posts with label रिश्ता. Show all posts

Sunday, August 18, 2013

रिश्ता लिफाफे में, सिमटा हुआ..


ईमेल एसएमएस की दुनिया में
डाकिये ने पकड़ाया लिफाफा
29 रुपए के स्टेम्प से सुसज्जित
भेजा गया था रजिस्टर्ड पोस्ट
पते के जगह, जैसे ही दिखी
वही पुरानी घिसी पिटी लिखावट
जग गए, एक दम से एहसास
सामने आ गए, सहेजे हुए दृश्य
वो झगड़ा, बकबक, मारपीट
सब साथ ही दिखा

प्यार के छौंक से सना वो
मनभावन, अलबेला चेहरा
उसकी वो छोटी सी चोटी,
उसमे लगा काला क्लिप जो होती थी,
मेरे हाथों कभी
एक दम से आ गया सामने
उसकी फ्रॉक, उसका सैंडल
ढाई सौ ग्राम पाउडर से पूता चेहरा
खूबसूरत दिखने की ललक
एक सुरीली पंक्ति भी कानों में गूंजी
“भैया! खूबसूरत हूँ न मैं??”

हाँ! समझ गया था,
लिफाफा में था
मेरे नकचढ़ी बहना का भेजा हुआ
रेशमी धागे का बंधन
था साथ में, रोली व चन्दन
थी चिट्ठी.....
था जिसमे निवेदन
“भैया! भाभी से ही बँधवा लेना !
मिठाई भी मँगवा लेना !!”
हाँ! ये भी पता चल चुका था
आने वाला है रक्षा बंधन
आखिर भाई-बहन का प्यारा रिश्ता
दिख रहा था लिफाफे में ......
सिमटा हुआ...........!!!
~मुकेश~


Friday, August 2, 2013

मौसम सा बदलता रिश्ता


मौसम की आवोहवा रिश्तों पर करती है असर !

ठंडी संवेदनाएं
और जम कर बनता बरफ
जैसा हो जाता है रिश्ता
अंधेरी सर्द भरी रात
बिलकुल घुप्प एवं ठंडी
दूरी मे रहती है गर्माहट
तो नज़दीकियाँ से हो जाती है सर्द
ये रिश्ता भी है अजीब
मौसम की आवोहवा रिश्तों पर करती है असर !

कभी कभी रिश्तों के बीच
चलती है लू जैसी गरम हवा
ढाती है कहर
झुलसा देती है अंदर तक
क्षण भर के कडवे गरम बोल
बना देते हैं पराये
तो ग्रीष्म ऋतु की दोपहरी के तरह
मौसम की आवोहवा रिश्तों पर करती है असर !

ये संबंधो का अलबेला रिश्ता
सुख-दुख के दामन के बीच
खेलता है, अठखेलियाँ करता है
फिर कभी कभी यही रिश्ता
सावन के मूसलाधार बारिश की तरह
आँखों से झर-झराने लगता है
ला देती है अंदर तक नमी  
फिर यही बरसता सावन  
लाता है गर्मजोशी
रिस जाता है दर्द …..
तो सही है कहा 

मौसम की आवोहवा रिश्तों पर करती है असर !