जिंदगी की राहें

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Sunday, August 3, 2014

प्रेम कविता

एक तरुणी ने
अपने प्रेमी के कानों में
की सरगोशी ....
क्या तुम सचमुच मेरे प्रेम में हो ?
अगर हाँ, तो 
क्या मेरे लिए लिख पाओगे कविता ?

अरे ये कौन सी बड़ी बात
प्रेमी ने सोचा-समझा
युवती के आँखों में झाँका
कलम से रंगे कुछ पन्ने
जो फाड़ कर फेके गए
फिर, अंत में उसने चूमा
प्रेयसी का हाथ
लिख दिया उसके हथेली पर ही
मेरे अंतस से आ रही आवाज
मैं तुमसे करता हूँ प्यार !
खुद से ज्यादा !!

प्रेमिका की डबडबाई आँखे 

बोझिल मुंदी पलकों के साथ
समेटा खुद को, उसके बांहों में
बाँधी मुट्ठी अपने हथेली की
चिपका कर उसे सीने से
बोल उठी लरजते हुए
अंग्रेजी के तीन लफ्ज़
लव यू टू !!

उफ़! क्या प्रेम का सम्प्रेषण व
बहते दिल के उद्गार से
बेहतरीन, हो भी सकती है
कोई प्रेम कविता??

प्रेम सिक्त चार आँखें
और, चार हाथ
बस हो साथ साथ
खुद-ब-खुद रच जाती है
प्रेम कविता !!!!
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क्या बन पायी प्रेम कविता ?