जिंदगी की राहें

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Tuesday, December 16, 2014

सुन रहे हो पकिस्तान !


वर्षों का अंतहीन दर्द झेला
माँ रूपी भारत वर्ष ने
और तुम कपूत 'पाकिस्तान'
जन्मे थे न 1947 में ...

जन्म के समय ही दी थी  तूने
असहनीय दर्द और पीड़ा
जिसको ता-जिंदगी झेल रही
तेरी माँ !! ये भारत माता !!

तुम्हारा जन्म नहीं था
एक सामान्य प्रक्रिया
सिजेरियन सेक्शन ही कहेंगे न
इस नए देश के बनने की प्रक्रिया को

सर्जरी से बनी
एक माँ की नाभि के पास
उस समय बनी रेडक्लिफ लाइन
आज तक दे रही दर्द व दंश

और तुम पाकिस्तान
आवारा, बदतमीज बच्चे की तरह
माँ के दर्द पर खिलखिलाते हो
तोड़ते हो हर पल
माँ का विश्वास और  गुरुर

धर्मान्धता की आड़ में
पता नहीं क्यों खेलते हो खेल
छलते हो,  करते हो
तोड़ने की कोशिश अपने ही भाई का हाथ

स्वर्ग जैसे कश्मीर पर
करते हो खून के छिंटो की बौछाड़
फिर भी कहाँ रहता है तुम्हे चैन
हर दिन दिखाते हो नया खेल

लो, अब भुगतो ! करो बर्दाश्त !
झेलो
समझो !!
कितना असहनीय होता है
वह दर्द
वह कराह
जब जाती है जान
नन्हो की,
सोचो उन माओं के लिए, जिनकी औलादें थी
इस सब का कारण तुम हो पाकिस्तान !!

पाकिस्तान !!
अब भी तेरी माँ, नहीं देगी बद्दुआयें !
बस संभल सकते हो तो संभल जाओ
नहीं तो ...
मरोगे तुम, नम होगी आँखे हमारी !!
सहोदर हो तुम, पाकिस्तान !!

पाकिस्तान !!
सुन रहे हो !
जियो और जीने दो !! प्लीज !!
अच्छा लगेगा !!
________________________
दिल से श्रद्धांजलि उन नन्हों के लिए .......... !!

पेशावर के एक स्कूल मे नन्हें बच्चों पर आतंकवादियों ने हमला कर सैकड़ों बच्चो की हत्या कर दी थी, ये कविता उन्हे समर्पित है !