जिंदगी की राहें

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Friday, March 5, 2021

प्रेम की दवा



सुनो तो,
तुम हो पैरासिटामॉल
या तुम ही हो क्रोसीन
या कहीं कोरोना वैक्सीन तो नहीं
तभी तो हर छह घंटे बाद के
मेडिकल खुराक की तरह
मैं जुकाम पीड़ित
पहुंचता हूँ तुम्हारे प्रोफ़ाइल पर
काश ये बुखार
साँप सीढ़ी की तरह खेलता रहे
काश तुम्हारा असर बना रहे !
वैसे भी कुछ दवाइयाँ
आयुर्वेदिक काढ़े जैसी
बिना डाक्टरी सलाह के भी
बिना किसी साइड एफ़ेक्ट्स के
होती है गुणकारी
तुम भी ऐसी ही हो न !
..... है न !!! 😉
~मुकेश~



2 comments:

Onkar said...

बहुत अच्छी कविता

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

तुम्हारी कल्पना का तो जवाब ही नहीं । अब आयुर्वेदिक काढा भी ।
बहुत प्यारी रचना